Thursday, September 20, 2012

अमि‍त रंजन (अमि‍त रंजन केँ वि‍देह नृत्‍यकला सम्‍मान- २०१२ देल गेल। बेचन ठाकुर हुनकासँ साक्षात्कार लेलनि।)



अमि‍त रंजन (अमि‍त रंजन केँ वि‍देह नृत्‍यकला सम्‍मान- २०१२ देल गेल। बेचन ठाकुर हुनकासँ साक्षात्कार लेलनि।)

बे.ठाकुर-     अहाँकेँ कार्यक प्रति रुचि केना कहियासँ जगल?
अमि‍त- जखन हम सभ कोइकेँ मंचपर नृत्‍य करैत देखलौं तँ हमरा इच्‍छा भेल जे एना हमहूँ करि‍तौं। 2005 ई.क ओ समए रहए।

बे.ठाकुर-     कार्य करबामे अहाँकेँ के प्रोत्साहित करैत अछि?
अमि‍त-       श्री बेचन ठाकुर जीक प्रोत्‍साहन हमरा सभकेँ भेटैत रहल अछि‍। ओ हमर गुरुजी सेहो छथि‍।
बे.ठाकुर-     पहिल बेर कोन कृति/ काजसँ अहाँ आरम्भ केलौं कहियासँ?
अमि‍त- पहि‍ल बेर हम गीत गेलौं। स्‍कूलमे। शुरूमे बेसी गीते गबैत छलौं। धीरे-धीरे नृत्‍यमे सोहो भाग लि‍अए लगलौं। ओना हमरा नृत्‍यमे बेसी प्रत्‍साहन भेटल।

बे.ठाकुर-     अहाँ अपन काजमे .“सोच”, .“कोनो पुरान वा नव लीखवा शिल्पऐ तीनूमे सँ केकरा प्रधानता दै छी?
अमि‍त- हम ऐ तीनूमे सोचकेँ बेसी प्रधान्‍ता दइ छी।
बे.ठाकुर-     अहाँ अपन काजक दिशाकेँ, रूपकेँ एक पाँतिमे कोन रूपमे वर्णन करब।
अमि‍त- हम अखन बी.ए. पार्ट-वनमे पढ़ैत छी। हि‍न्‍दी ऑनर्स अछि‍। दसमामे मैथि‍ली एच्‍छि‍क वि‍षयमे पढ़ने छी। मैथि‍लीसँ प्रेम अछि‍। मौका भटैत रहत तँ आरो कि‍छु-कि‍छु करैत रहब।
 
बे.ठाकुर-     अहाँ जइ विधामे लागल छी ओकर की व्यक्तिगत विशेषता छै, क्षेत्रमे कार्यरत दोसर लोकक काजसँ कोन अर्थे भिन्न छै?
अमि‍त- संगीसँ सि‍नेह अछि‍। गबैयोमे बड्ड मन लगैए।
बे.ठाकुर-     की अहाँक काज अहाँक जीवन-यापनक काजमे, घरेलू काजमे बाधा होइए वा सहायता पहुँचाबैए?
अमि‍त- हमर जीवन-यापनमे घरेलू काज कोनो महत्‍वपूर्ण नइए। हम ओइ सभसँ अलग छी। खाली पढ़ै-लि‍खैक रहैए। तँए हमरा कोनो बाधा नै अछि‍। घरसँ बहुत सहायता भेटैए।

बे.ठाकुर-     अहाँ अपन आन रुचिक विषयमे बताउ।
अमि‍त-       संगीसँ सि‍नेह अछि‍। गबैयोमे बड्ड मन लगैए।





परि‍चए- श्री अमित रंजन, पि‍ताक नाअों- श्री नागेश्वर कामत, गाम- पौराम, पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी, बि‍हारक स्‍थायी नि‍वासी छथि‍। १८ वर्षीय अमि‍त १२म कक्षाक छात्र छथि‍। अनुमण्‍डल स्‍तरपर नृत्‍यकलामे हि‍नका प्रथम पुरस्‍कार भेटल छन्‍हि‍। जे.एम.एस. कोचि‍ंग सेन्‍टर, चनौरागंजक प्रांगणमे आयोजि‍त सांस्‍कृति‍क कार्यक्रममे नृत्‍य लेल सराहल जाइत रहला अछि‍। वि‍देह नृत्‍यकला सम्‍मान- २०१२ सँ सम्‍मानि‍त करैत वि‍देह परि‍वार प्रसन्नता महसूस करैत अछि‍।
 

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